विकसित भारत में नौगाँव-मानस एयरपोर्ट: एक ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने की मांग

विकसित भारत में नौगाँव-मानस एयरपोर्ट: एक ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने की मांग 

विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए, बुनियादी ढांचे का विकास आवश्यक है। आजादी के अमृत महोत्सव के बाद, भारत सरकार विमानन क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रही है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगाँव-मानस क्षेत्र में एक पुराना एयरपोर्ट पुनर्जीवित करने की मांग तेज हो रही है। स्थानीय निवासी और जनप्रतिनिधि 'जियाक, छतरपुर, मांझू, नागांव' जैसे आसपास के क्षेत्रों से जुड़ाव के साथ 'जान-मानस एयरपोर्ट' की मांग कर रहे हैं। यह मांग केवल सामाजिक और आर्थिक विकास तक सीमित नहीं, बल्कि ब्रिटिश काल की एक ऐतिहासिक विरासत को जीवंत करने का प्रयास है। 

ज्ञात हो कि छतरपुर - नौगांव मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का एक शहर और तहसील मुख्यालय है, जो अपनी ऐतिहासिक सैनिक छावनी और बुंदेलखंड एजेंसी के ब्रिटिश मुख्यालय के रूप में भी जाना जाता है। यह झांसी, सतना जैसे स्थानों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है और एक महत्वपूर्ण नागरिक व कृषि का केंद्र भी है। खैर आइए, इस खबर की गहराई से पड़ताल करते है। और जानने का प्रयास करते है कि जो बुंदेलखंड एजेंसी का मुख्यालय था 19वीं शताब्दी में, वह नौगाँव जो इस क्षेत्र के रियासतों (जैसे ओरछा, पन्ना, छतरपुर, दतिया) को नियंत्रित करता था। समय के साथ उसके साथ सरकार ने कैसा सौतेला रवैया अपनाया।  



ब्रिटिश काल का गौरवशाली अतीत: नौगाँव में गैर-सक्रिय एयरपोर्टब्रिटिश शासन के दौरान

नौगाँव (जिसे कभी नौगong या नोगाँव के रूप में जाना जाता था) एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र था। 19वीं शताब्दी में, ब्रिटिश सरकार ने यहां एक व्यावसायिक और सैन्य एयरपोर्ट विकसित किया था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के समय रणनीतिक महत्व का था। यह एयरपोर्ट कोहिमा (असम) और बर्मा (म्यांमार) के युद्धक्षेत्रों के लिए सहायक लैंडिंग स्ट्रिप के रूप में कार्य करता था। हालांकि, आजादी के बाद यह गैर-सक्रिय हो गया। वर्तमान में, यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के सागर संभाग के पास स्थित है, जहां एक सैन्य अस्पताल और अस्पताल के निकट एक बड़ा क्षेत्र सैन्य छावनी के अधीन है। 

बुंदेलखंड एजेंसी, जो ब्रिटिश सरकार की एक प्रशासनिक इकाई थी, का मुख्यालय नौगाँव में ही था। यह एजेंसी बुंदेलखंड क्षेत्र के राज्यों जैसे ओरछा, पन्ना, छतरपुर, दतिया आदि को नियंत्रित करती थी। यहां एक सैन्य फील्ड अस्पताल स्थापित किया गया था, जो युद्ध घायलों के इलाज के लिए था। एयरपोर्ट के पास ही यह अस्पताल था, जो ब्रिटिश सेना की रसद प्रणाली का हिस्सा था। आज, यह क्षेत्र टॉप 10 सैन्य छावनियों में से एक के रूप में जाना जाता है। 

भारत की प्रमुख सैन्य छावनियां इस प्रकार हैं:


1- डांपूर छावनी बिहार (पटना के पास) पूर्वी कमांड का मुख्यालय 2 , जोधपुर छावनी राजस्थान दक्षिण-पश्चिमी कमांड , 3 , कानपुर छावनी उत्तर प्रदेश मध्य कमांड का केंद्र , 4 बैंगलोर छावनी कर्नाटक दक्षिणी कमांड , 5 , मेरठ छावनी उत्तर प्रदेश पश्चिमी कमांड , 6 , अम्बाला छावनी हरियाणा वायुसेना केंद्र , 7
सेकुंडराबाद छावनी तेलंगाना दक्षिणी कमांड , 8 जाबलपुर छावनी मध्य प्रदेश मध्य कमांड , 9 रामगढ़ छावनी झारखंड प्रशिक्षण केंद्र और 10 था 
नौगाँव छावनी , मध्य प्रदेश (छतरपुर) बुंदेलखंड का ऐतिहासिक केंद्र। नौगाँव की छावनी ब्रिटिश काल से ही रणनीतिक महत्व रखती है, और इसका बड़ा क्षेत्र (लगभग 198 एकड़) एयरपोर्ट के पुनर्विकास के लिए उपयुक्त है।


पुन: संचालन की मांग: 

सामाजिक और आर्थिक लाभस्थानीय लोग इस एयरपोर्ट को पुन: संचालित करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह क्षेत्र पर्यटन, कृषि और व्यापार का केंद्र है। छतरपुर जिले के 'जियाक' (जिसे कभी जीआक कहा जाता था) और 'मांझू, नागांव' जैसे गांवों से जुड़े निवासी मानते हैं कि एयरपोर्ट का पुन: खुलना विकसित भारत के 'वंदे भारत' मिशन को मजबूत करेगा। खजुराहो एयरपोर्ट (छतरपुर से मात्र 45 किमी दूर) पहले से ही सीमित उड़ानों का संचालन कर रहा है, लेकिन नौगाँव का एयरपोर्ट इससे बड़ा हो सकता है।पर्यटन को बढ़ावा: बुंदेलखंड के ऐतिहासिक स्थल जैसे खजुराहो मंदिर, झांसी किला और ओरछा महल नजदीक हैं। एयरपोर्ट से दिल्ली, मुंबई और कोलकाता की उड़ानें पर्यटकों को आकर्षित करेंगी।

आर्थिक विकास: क्षेत्र में कृषि उत्पाद (गेहूं, दालें) के निर्यात के लिए कार्गो सुविधा बनेगी। स्थानीय रोजगार बढ़ेगा, जैसा कि खजुराहो में हुआ।
सैन्य महत्व: पुन: संचालन से सैन्य अस्पताल और छावनी को मजबूती मिलेगी, जो पहले से ही सक्रिय है।

मध्य प्रदेश सरकार ने 2023 में इस प्रस्ताव पर विचार किया, और केंद्र सरकार के विमानन मंत्रालय ने सर्वेक्षण शुरू किया है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी चुनौतियां हैं। चुनौतियां और समाधानएयरपोर्ट का पुन: संचालन 'ओनली सोशल स्टक' (केवल सामाजिक बाधाओं) से जूझ रहा है। ब्रिटिश काल की पुरानी संरचनाएं क्षतिग्रस्त हैं, और सैन्य क्षेत्र का विस्तार बाधा है। लेकिन, यूएसए मॉडल (जैसे हिंदन एयरपोर्ट, जहां सिविल एन्क्लेव सैन्य उपयोग के साथ संचालित है) से प्रेरणा ली जा सकती है।

खबर के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार ने 2025 में एक नई सिविल एविएशन पॉलिसी जारी की है, जो राज्य में विमानन क्षेत्र को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस नीति के तहत, निवेश आकर्षित करने के प्रयास हो रहे हैं, जैसे कि एयर इंडिया एक्सप्रेस की नई उड़ानें, भोपाल में MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल) सुविधा, और उज्जैन एयर तथा फ्लाई भारत जैसी नई परियोजनाएं। यह नीति आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देती है, लेकिन इसमें नौगाँव-मानस एयरपोर्ट का कोई विशेष उल्लेख नहीं है। ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश सरकार ने 2025 में बजट में 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 

एक नया अध्याय नौगाँव-मानस एयरपोर्ट का पुन: संचालन न केवल ब्रिटिश विरासत को सम्मान देगा, बल्कि विकसित भारत के हवाई संपर्क को मजबूत करेगा। स्थानीय मांग 'जन-मानस' की पुकार है – यह समय है कि सरकार इसे प्राथमिकता दे। यदि सफल हुआ, तो यह बुंदेलखंड को हवाई नक्शे पर स्थापित कर देगा, और हजारों परिवारों का सपना साकार होगा। क्या यह एयरपोर्ट जल्द ही उड़ान भरेगा? समय बताएगा, लेकिन उम्मीद की किरण जरूर है।



विकसित भारत में नौगाँव-मानस एयरपोर्ट का विकास: अब क्यों जरूरी?


विकसित भारत @2047 की महत्वाकांक्षी दृष्टि में, बुनियादी ढांचे का विस्तार देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने का आधार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, विमानन क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है—2025 तक 220 से अधिक एयरपोर्ट स्थापित करने का लक्ष्य है, और UDAN योजना के तहत दूरदराज क्षेत्रों को हवाई संपर्क से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का नौगाँव-मानस एयरपोर्ट (ब्रिटिश काल का गैर-सक्रिय सैन्य-व्यावसायिक हवाई अड्डा) का पुनर्विकास अब अनिवार्य हो गया है। यह न केवल बुंदेलखंड क्षेत्र को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि राज्य और राष्ट्र की समावेशी विकास यात्रा को गति देगा। 

नौगाँव-मानस एयरपोर्ट ब्रिटिश शासनकाल (19वीं शताब्दी) का एक प्रमुख सैन्य केंद्र था, जो बुंदेलखंड एजेंसी का मुख्यालय था। यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रणनीतिक भूमिका निभाता था, लेकिन आजादी के बाद यह गैर-सक्रिय हो गया। मध्य प्रदेश सरकार की विकास योजना (प्रारूप) में नौगाँव को सुव्यवस्थित नगर नियोजन के तहत शामिल किया गया है, जो एयरपोर्ट पुनर्विकास की संभावना दर्शाता है। हालांकि, 2025 तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई, लेकिन स्थानीय मांग और राष्ट्रीय विमानन नीति इसे प्रासंगिक बनाती है।

बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र में एयरपोर्ट से पर्यटन, कृषि निर्यात और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। खजुराहो (नजदीकी यूनेस्को साइट) से मात्र 45 किमी दूर, यह पर्यटकों को आकर्षित करेगा। मध्य प्रदेश में विमानन नीति 2025 के तहत MRO (मेंटेनेंस) सुविधाएं विकसित हो रही हैं; नौगाँव इसमें योगदान दे सकता है, जिससे हजारों नौकरियां पैदा होंगी। 

UDAN-5 के तहत नए रूट्स जोड़ने से दिल्ली, मुंबई और भोपाल से सीधी उड़ानें संभव होंगी। यह आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों (जैसे जियाक, मांझू, नागांव) को मुख्यधारा से जोड़ेगा। मध्य प्रदेश को 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के माध्यम से कवर किया जा रहा है, जहां महिलाओं, युवाओं और किसानों को प्राथमिकता है। एयरपोर्ट से स्वास्थ्य शिविर (जैसे 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' अभियान) और शिक्षा पहुंच आसान होगी।

नौगाँव-मानस को नवी मुंबई (30 सितंबर 2025 उद्घाटन) या नोएडा एयरपोर्ट की तरह विकसित किया जा सकता है, जो महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नया आयाम दे रहे हैं। मध्य प्रदेश में नागपुर MIHAN जैसी परियोजनाएं सफल हैं, जो नौगाँव के लिए मॉडल बन सकती हैं।

नौगाँव-मानस एयरपोर्ट का विकास विकसित भारत का अभिन्न हिस्सा है—यह ब्रिटिश विरासत को आधुनिक भारत की उड़ान देगा। मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र को इसे प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि बुंदेलखंड 'विकसित' का प्रतीक बने। स्थानीय मांग 'जन-मानस' की पुकार है; अब समय है कार्रवाई का। यदि यह उड़ान भरेगा, तो हजारों सपने साकार होंगे!

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